कोरोना : अब डराओ ना
कोरोना : अब डराओ ना विनाश का भय विनाश से अधिक पीडादायक होता है । दुर्घटना से भारी पडता है दुर्घटना का डर। एक अदृश्य वायरस से होने वाले विनाश का डर इस समय पूरे विश्व पर हावी है । जनवरी के अंत से ही संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी के खतरों की विवेचना कर रहा है और तीन महीने बीत जाने के बाद भी इस भय से कोई मुक्ति मिलती नजर नहीं आ रही है। न तो इस बीमारी के लक्षणों के बारे में कोई स्पष्टता है और न ही कोई निश्चिंत इलाज । टीके की चर्चा जोरों पर है मगर टीका अभी पहुँच से काफी दूर है। इस बीच दुनिया जैसे रुक सी गयी है। सब कुछ बंद। दुकान, उद्योग, हस्पताल, स्कूल, कालेज, दफ्तर, रेल, बस, जहाज। रोजगार, कमाई, तनख्वाह । केवल नहीं हो रहा है बंद कोरोना का फैलाव और भूख का सितम । जिस प्रकार का भय का वातावरण सृजन करने का काम विश्व स्वास्थ्य संगठन, विशेषज्ञ या सरकारें कर रहीं हैं वह सही है ? इसके फैलाव की दर नि:संदेह बहुत अधिक है । मगर क्या यह अन्य बिमारियों की ...
